Friday, August 28, 2026

अब बस..

बस तेरे बदलने की कसर रह गई थी,
बाकी तो ज़िंदगी ने सता ही रखा था।
उम्मीद नहीं थी कि तू भी दुख देगा,
... क्योंकि तुझे तो हर दुख बता रखा था। 



ये जो अब थम रही है 
तुझसे बात करने की आदत,
यक़ीन मान, 
इसके पीछे सिसकियाँ बेहिसाब हैं।


चारु

3 comments:

Anonymous said...

Awesome

Anonymous said...

You should write more often.

Charu Agarwal said...

Thanks.